पटना (न्यूज सिटी)। राष्ट्रव्यापी लॉक डाउन में लोगो को क्या क्या परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है? ऐसा ही परेशानी एक व्यक्ति को अपनी ही शादी में लॉक डाउन का मुसीबत झेलना पड़ा।






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मामला पटना सिटी के आलमगंज थाना क्षेत्र की है, जहां मिस्का टोली निवासी जैसमीन परवीन की शादी बीते 22 मार्च को होनी थी और उस दिन कोरोना को लेकर देश मे जनता कर्फ्यू भी लगा था। इसी दौरान जैसमीन परवीन की बारात 22 मार्च को कोलकाता से पटना आयी थी। बारात लेकर मो• असलम कोलकाता से पटना तो पहुंच गया लेकिन लॉक डाउन की बंदिशों के कारण वो अपने दुल्हन को विदाई नही करा सका। जिस कारण से कोलकाता से आये 28 बाराती समेत दूल्हा-दुल्हन यही फंस गए। बारात में आये कुछ लोगो के रहने की व्यवस्था लडक़ी पक्ष वालों ने कराई, जबकि कुछ बाराती पार्टी के लोग अपने अपने रिश्तेदारों के यहां रहकर जैसे तैसे लॉक डाउन के 47 दिनों का वक्त बिताया।









ऐसी लॉक डाउन के पाबंदियों के बीच बाराती पार्टी को घर वापसी को लेकर दूल्हा-दुल्हन पक्ष के लोग इंतजाम के लिए सरकारी दफ्तर से लेकर अन्य सामाजिक लोगों के पास पैरवी व जुगाड़ लगाने का अथक प्रयास किया। परंतु परिणाम कुछ भी न निकला। लेकिन इसके बाद भी दूल्हा पक्ष के लोग हार नहीं माने और अपनी वापसी को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार और पटना के कलेक्टर से मदद की गुहार लगाई। जिसके बाद बीते शनिवार को बारातियों को बस से जमुई के लिए रवाना की गई। बारातियों का जत्था जमुई पहुंचते ही वहां से पश्चिम बंगाल सरकार की मदद से बस के द्वारा उनको कोलकाता ले जाया जाएगा। वही लॉक डाउन के कारण 47 दिनों से बिहार के पटना सिटी में फंसे बारातियों ने चैन की सांस ली हैं।






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वही अपने घर वापसी को लेकर दूल्हा के चाचा मोहम्मद गुलाम हुसैन ने बताया कि हमें खुशी हो रही है कि हम इस लॉक डॉउन के अवधि में भी पूरी बाराती सहित दुल्हन को भी विदा कराकर कोलकाता ले जा रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे लिए पटना का कलेक्टर कुमार रवि और जिला प्रशासन की तरफ से घर वापसी के लिए साधन मुहैया कराना और इफ्तार सहित खाने पीने की चीजों के लिए व्यवस्था कराना अति प्रशंसनीय है और मैं इसके लिए उन्हें धन्यवाद देता हूं।


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