पटना (न्यूज सिटी)। पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य पप्पू वर्मा ने कहा कि गृह मंत्रालय द्वारा शर्तों के आधार पर विभिन्न राज्यों में रह रहे बिहार के छात्रों एवं मजदूरों एवं पर्यटकों को बिहार लाने की अनुमति देना स्वागत योग्य कदम है। मैं बार-बार केंद्र एवं राज्य सरकार से माँग कर रहा था की शर्तों के आधार पर ही बिहार के बाहर रह रहे लोगों को राज्य में वापस लाया जाए। क्योंकि वैश्विक महामारी में थोड़ी सी भी चूक बिहार में बड़े पैमाने पर बिहार वासियों को मुसीबत में ले जा सकता है। क्योंकि लाना समस्या का समाधान तो है। लेकिन यहां लाकर उन्हें व्यवस्थित करना एवं शर्तों के आधार पर पूरा चेकअप कराने के बाद उन्हें उनके घरों तक पहुंचाना यह सबसे बड़ा बिहार जैसे राज्यों के लिए क्रांतिकारी कदम होगा।









श्री वर्मा ने कहा कि बिहार के बाहर रह रहे लाखों की संख्या में छात्र एवं मजदूरों को लाने से पहले स्क्रीनिंग करने के बाद बिहार में उन्हें होम क्वारंटीन में रखने के बाद पूरी संतुष्टि के बाद ही उन्हें उनके घरों तक पहुंचाया जाए। ऐसा प्रतीत होता है कि इस बीमारी को लंबा चलने का उम्मीद है इसलिए बिहार सरकार को ग्राम स्तर पर रोजगार की व्यवस्था कर बाहर गए मजदूरों को बिहार में ही उन्हें काम में लगा कर उन्हें रोजगार देना चाहिए। रोजगार की व्यवस्था करना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती होगी क्योंकि आने के बाद भी काम नहीं मिलने पर उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।






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दूसरे प्रदेशों में पढ़ने वाले छात्रों को यदि बिहार में लाया जाता है तो जब तक इस बीमारी का पूरी तरह सफाया ना हो जाए तब तक अपने राज्य में ही रहकर ऑनलाइन पढ़ाई के माध्यम से उन्हें अपना कोर्स को पूरा करना होगा। काम पर राज्य से बाहर गए मजदूरों एवं पर्यटकों को जबतक इस बीमारी का अस्थाई रूप से इलाज एवं दवा न निकल जाए तब तक उन्हें राज्य से पुनःबाहर जाने की अनुमति नहीं दिया जाना चाहिए एवं वर्तमान समय में सभी बिहार वासियों का कर्तव्य बनता है कि राज्य के हित में केंद्र एवं राज्य सरकार के सभी निर्णयों का स्वागत,सहयोग वं पालन करें ताकि हमारे समर्थन की ताकत से केंद्र एवं राज्य सरकार को हम लोगों के लिए काम करने में उत्साह बना रहे।


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