पटना (न्यूज सिटी)। पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य पप्पू वर्मा ने कहा कि जिन विश्वविद्यालय का कुलपतियों का कार्यकाल 02 मई, 2020को समाप्त हो रहा है, वैसे सभी कुलपति 6 मार्च से किसी भी प्रकार का नीतिगत फैसला प्रमोशन, नियुक्ति, डेली रूटीन वर्क महामहिम राज्यपाल के दिशा निर्देश के अनुसार नहीं ले सकते हैं। लेकिन कुछ विश्वविद्यालय के कुलपतियों द्वारा नियम कानून को ताक पर रखकर लगातार कुछ कर्मचारियों का मनमाफिक प्रमोशन, शिक्षकों का प्रमोशन, कर्मचारियों के मन के मुताबिक ट्रांसफर, नियुक्ति ऐसे अनेक अनैतिक कार्यों को इन कुलपतियों द्वारा बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। सभी तरह के मीटिंग को बैक डेट में दिखाकर इस तरह के अनैतिक कार्य धड़ल्ले से जारी है। इन कुलपतियों ने अपने पद की गरिमा को ताख पर रखकर अनैतिक कार्यों को अंजाम दे रहे हैं। जो सरासर महामहिम कुलाधिपति महोदय का खुल्लम खुल्ला दिशा निर्देशों का मजाक है।
साथ ही श्री वर्मा ने कहा कि इन विश्वविद्यालयों में लगातार भ्रष्टाचार करते हुए अपने चहेते शिक्षकों का प्रमोशन, अपने चमचों का कर्मचारियों में नियुक्ति एवं उनका प्रमोशन उनके द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है। जो इनके पद के अनुकूल नहीं है। मैं महामहिम राज्यपाल महोदय से अभिलंब इन कुलपतियों द्वारा किए गए अनैतिक एवं काले कार्यों को रोकते हुए एवं एवं इनके द्वारा दिए गए निर्देशों को रद्द करते हुए इन कुलपतियों पर उच्चस्तरीय जांच बैठा कर इनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें ताकि डूब चुके बिहार के शिक्षा व्यवस्था को ऐसे शिक्षाविदों से बचाया जा सके।


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