पटना (न्यूज सिटी)। आज प्रेस विज्ञप्ति जारी कर राज्यसभा के पूर्व सांसद आर के सिन्हा ने कहा कि अभी तक बिहार में कोरोना से लड़ाई अच्छी तरह लड़ी जा रही थी। जिस प्रकार, पूरे विश्व में भारत सबसे अच्छी लड़ाई लड़ रहा था, उसी प्रकार बिहार देश के सभी प्रदेशों में सर्वोच्च स्थान पर ही था। लेकिन, कोरोना से पोजिटिव मरीजों की संख्या में अचानक वृद्धि होने के कारण अब यह संख्या 83 हो गयी है, जिसमें 9 पोजिटिव मरीज तो मुंगेर जिला के एक ही परिवार में मिले हैं। लेकिन, इस बीच कल एक बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण घटना ध्यान में आयी है कि लगभग साढे छह सौ से ज्यादा जमातियों ने लॉकडाउन के दौरान नालन्दा में एक मरकज का आयोजन किया जिसमें बिहार और झारखंड के अनेक जिलों से जमाती आये। इस आयोजन के लिए न तो प्रशासन की पूर्वानुमति ली गई न ही पुलिस को या प्रशासन को इसकी सूचना दी गयी। यह बहुत ही गंभीर मामला है । माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी के गृह जिला नालन्दा में इसको आयोजित करने में सुनियोजित षडयंत्र करने की बू आ रही है। तबलीगियों के मरकज तो बिहार के हर जिलों में है। पटना, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर आदि सभी जगहों में तो बड़ी-बड़ी सम्पतियां फैली हुई हैं। फिर नालन्दा ही क्यों चुना गया और पंडाल लगाकर और कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर यह काम किया गया। यह एक गंभीर मामला है। इस पर सख्त से सख्त कारवाई की जानी चाहिए और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाना चाहिए।
लेकिन, अभी भी यदि सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा जाय और तबलीगी जमात के लोगों के भ्रमण के ठीक स्थानों का पता लगा करके, उन सबको आइसोलेशन किया जाये जिससे जमाती मिले-जुले हैं तो स्थिति पर नियंत्रण हो सकता है। उन्हें बीमारी के खतरे के बारे में भी बताया जाय और जागरूक किया जाये। कोरोना हिन्दू, मुसलमान को नहीं पहचानता, उसे तो बस संक्रमण का वाहक एक जिन्दा शरीर चाहिए।

श्री सिन्हा ने कहा कि मैं फिल्मस्टार सलमान खान को धन्यवाद देना चाहता हूँ। उन्होंने अच्छा बयान दिया है। उनके 9 मिनट के विडियों को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित करके लोगों को सुनाना चाहिए कि उन्होंने किस प्रकार जागरूक किया है अपने कौम को, कि वे कोई गलतफहमी में न आये और डाक्टरों और नर्सो के साथ अच्छा व्यवाहर करें और अपना ईलाज करायें।
जनधन खाता में प्रधानमंत्री ने सभी गरीबों को पांच सौ रूपये महीने भेज तो दिये हैं। लेकिन इन पांच सौ रूपयों को लेने के लिए बैंको में लम्बी कतारें लगाई जा रही है, जिससे कि सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ रही है। कहीं ऐसा नहीं हो कि पांच सौ रूपये के चक्कर में अनेकों गरीब संक्रमित हो जायें और अपनी जान गवां बैंठे। अतः पुलिस प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं सब का दायित्व है कि सोशल डिस्टेंसिंग का और पूर्ण लॉकडाउन का सख्ती से पालन किया जाये।


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