पटना (न्यूज सिटी)। जदयू के प्रदेश प्रवक्ता अरविन्द निषाद ने कहा कि जनता दल (यू0) एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पुरानी मांग है जातीय जनगणना। इसलिए नीतीश कुमार लोकदल के नेता के हैसियत से तत्पश्चात जनता दल के राष्ट्रीय महासचिव एंव संसदीय दल के उपनेता के तौर पर देश में तथा बिहार में जातीय जनगणना कराने की मांग करते रहे है।श्री अरविन्द निषाद ने कहा कि वाजपेयी मंत्रिमंडल के सदस्य के तौर पर भी नीतीश कुमार जातिय जनगणना कराने की वकालत किया था। वर्ष 2005 में नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बनने के बाद जनगणना वर्ष 2009 में भी मुख्यमंत्री तौर पर जातिय जनगणना कराने की माॅंग किया एवं संसद के दोनो सदनों में जनता दल (यू0) ने पुरजोर तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर जनगणना कराने की माॅंग जदयू ने किया था। बिहार में सवर्ण आरक्षण लागू करने के दरम्यान भी नीतीश कुमार ने जातिय जनगणना कराने की पुरानी माॅंग दोहराई थी।

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साथ ही कहा कि जातिय जनगणना सम्पन्न हो जाने पर राज्य सरकार एवं केन्द्र सरकार को योजनाएं बनाने एवं उसके सफल संचालन में काफी सहायता होगी और राजद सिर्फ समाजिक न्याय की बात करता है। परन्तु राजद समाज के कमजोर वर्गों के उत्थान में रूची नही लेता है। लोकसभा एवं राज्यसभा में अनुसुचित जाति एवं जनजाति के आरक्षण बढ़ाने हेतू अनुसूचित जाति व जनजाति आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए राज्यसभा में राजद के चार सांसदों में सिर्फ 01 सांसद ही मौजूद था। बिल को सदन से पास कराने के लिए सदन के दो तिहाई सदस्यों केा समर्थन आवश्यक होता है। चर्चा के दौरान राजद के एक तिहाई सांसदों के अनुपस्थिति से अंदाज लगाया जा सकता है कि राजद सामाजिक न्याय में कितना विश्वास करती है?
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