पटना (न्यूज सिटी)। पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य पप्पू वर्मा ने कहा कि बिहार सरकार का नल जल योजना लोगों के घरों तक पानी पहुंचाने का अच्छा प्रयास, परंतु काम की जांच होनी चाहिए। बिहार सरकार का अति महत्वाकांक्षी कार्यक्रम नल जल योजना के तहत बिहारवासियों के कितने घरों तक पानी पहुंचा है, इसकी स्वयं मॉनिटरिंग एवं जांच बिहार सरकार को करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि नल जल योजना के तहत संपूर्ण बिहार वासियों को राज्य सरकार द्वारा उनके घरों तक पानी पहुंचाने की योजना थी। लेकिन मिल रहे जानकारियों के अनुसार बिहार सरकार की इस शानदार योजना का हवा बिहार के सरकारी अधिकारियों, ठेकेदारों, वार्ड एवं पंचायत प्रतिनिधियों द्वारा बड़े पैमाने पर निकाला गया व इन लोगों द्वारा इस योजना में लापरवाही बरतने का मामला भी देखने को मिल रहा है। इस योजना में बिहार सरकार ने एक बड़ी बजट का प्रावधान रखा था इस योजना में ग्रामीण स्तर व शहरों में वार्ड स्तर पर पाइप लाइन बिछाकर लोगों को घरों तक पानी का कनेक्शन पहुंचाना था। लेकिन इस योजना में बड़े पैमाने पर धांधली व भ्रष्टाचार का मामला सामने आ रहा है।

साथ ही श्री वर्मा ने कहा कि नल-जल योजना के तहत कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाया गया। परंतु पानी अभी तक उनके घरों तक नहीं पहुंचा है। उसी प्रकार शहरों में भी वार्ड स्तर पर कुछ स्थानों पर पाइपलाइन बिछाया गया, लेकिन मामला ज्यों का त्यों बना हुआ। आखिर बिहार सरकार द्वारा बिहार वासियों के लिए किए जा रहे हैं। अच्छे प्रयासों में रोड़ा कौन बन रहा है इसके पीछे कौन अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का साजिश है। इसका पता बिहार सरकार को करना चाहिए एवं बिहार के विकास में लापरवाही बरतने व इस योजना के घोटाले में शामिल दोषियों पर कार्रवाई सरकार को तुरंत करना चाहिए।
श्री वर्मा ने कहा कि बिहार एक गरीब प्रांत है बिहार में आय का स्रोत बंद है बहुत ही मुश्किल से बिहार सरकार ने इन सभी योजनाओं पर बजट का प्रावधान रखा था। लेकिन बड़े पैमाने पर सरकारी अधिकारियों, ठेकेदारों व जनप्रतिनिधियों ने भ्रष्टाचार में लिप्त होकर बिहार के लोगों के साथ भद्दा मजाक किया है। बिहार सरकार सिर्फ कान में तेल डालकर सभी प्रकार के योजनाओं का अपना चेहरा चमकाने के लिए एलान तो कर देती है परंतु इन सभी कामों पर निगरानी के लिए कोई प्रावधान ब योजना नहीं बनाती है। जिसका खामियाजा संपूर्ण बिहार वासियों को भुगतना पड़ता है। अविलंब बिहार सरकार को समय-समय पर निगरानी विभाग से जांच करवा कर इस महत्वाकांक्षी योजना के लीपापोती में शामिल सभी दोषियों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। ताकि बिहार बिहार-वासियों के पैसों का बंदरबांट करने वालो का चेहरा बेनकाब हो सके।


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