पटना (न्यूज सिटी)। पटना विश्वविद्यालय के सिंडिकेट सदस्य पप्पू वर्मा ने कहा कि वैश्विक महामारी के समय महाराष्ट्र और दिल्ली प्रदेश के राज्य सरकारों ने बिहारी मजदूरों के साथ अमानवीय व्यवहार किया हैं। महाराष्ट्र और दिल्ली प्रदेश के उद्योग धंधे को चमकाने में बिहार के श्रमिकों का खून पसीना लगा हुआ है। दोंनो राज्यों की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में बिहारियों के मेहनत व ईमानदारी से सेवा देने का परिणाम है।









साथ ही श्री वर्मा ने कहा की बिहार का दुर्भाग्य रहा कि सत्ता ऐसे लोगों के हाथ में रहा कि मेहनतकश मजदूरों के हाथों में काम देने के बजाए सभी उद्योग-धंधा चौपट कर के उन्हें बिहार से पलायन करने पर मजबूर कर दिया। बिहार से बाहर गए मजदूरों ने उन प्रदेशों को अपनी मेहनत से सजाने संवारने का तो काम किया ही उनको आर्थिक महाशक्ति बनाने का भी काम किया। लेकिन वैश्विक महामारी के समय कल कारखाने थोड़े दिनों के लिए बंद हुए तो उन लोगों ने इन मजदूरों से मुंह मोड़ना शुरू कर दिया।






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वर्षों से काम ले रहे बिहार के इन मजदूरों के साथ ना सिर्फ उनलोगो ने अमानवीय व्यवहार किया बल्कि उनके बाल बच्चों सहित उन्हें सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया। इस जघन्य कृत्य में वहां की राज्य सरकारों ने भी मुसीबत के समय मजदूरों को वहां से भगाने के लिए नए-नए तरकीब इजाद करने लगा जैसे कि मजदूरों के बस्तियों में जाकर अफवाह फैलाना, उनको बाल बच्चों सहित भगाने के लिए महामारी के संबंध में कई प्रकार का मनगढ़ंत बातें उन लोगों के बीच में उड़ाया गया। जबकि बार-बार भारत सरकार द्वारा इन लोगों को मदद करने के लिए कई प्रकार का आर्थिक बजट भी इन राज्य सरकारों को दिया गया। वैश्विक महामारी के समय इन राज्यों द्वारा किए गए बिहार के मजदूरों के साथ दुश्मनों जैसा बर्ताव का जवाब बिहार के लोगों द्वारा बिहार को आर्थिक रूप से मजबूत बनाकर देना होगा।


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