पटना (न्यूज सिटी)। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता सुरेष रूंगटा ने कहा कि आजादी के काल से ही कांग्रेस एवं वामदलों ने देष और समाज को धर्म-जाति, ऊंच-नीच के विभेदकारी क्षूद्र-नीति के तहत अलगाववाद की भावना को उकसाकर इसका फायदा वोट बैंक के लिए किया। यही कारण है कि आज भी कांग्रेस एवं वाम-विचार की पार्टियां केन्द्र सरकार द्वारा संसद से पास किये गये ” नागरिकता संशोधन कानून “ के विरोध में एक समुदाय विशेष के लोगों को गुमराह कर रही हैं। उनके बीच यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि मोदी सरकार उनकी नागरिकता को खत्म कर उन्हें देष से बाहर कर देगी। जबकि सीएए किसी की नागरिकता छिनने वाला कानून नहीं है, बल्कि यह पड़ोसी देशों से आए शरणार्थियों को नागरिकता देने वाला कानून है। यह कानून भारत में रह रहे नागरिकों के हितों को कहीं से भी प्रभावित नहीं करता है। नागरिकता कानून धार्मिक उत्पीड़न के कारण पड़ोसी मुल्क से अपना सब कुछ लूट जाने पर लाचार एवं बेवस होकर आए, मुख्य रूप से दलितों को भारत की नागरिकता देने वाला कानून है। जिसका विरोध करना मानवता के नाम पर, एक ओछी सियासत है।

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कांग्रेस या राजद सीएए कानून में एक भी ऐसा प्रावधान नहीं बता सकती है, जिसके तहत भारत में किसी की नागरिकता छिनी जा सकती है। वास्तव में तो विपक्ष के पास अब मोदी सरकार का विरोध करने के लिए कोई मुद्दा ही नहीं बचा। ऐसे में ये दल एक समुदाय विशेष के लोगों को गुमराह कर अपना खोया जनाधार को वापस पाने की छटपटाहट में ही सीएए का विरोध कर रहे हैं। देश की आम जनता पूरी तरह से केन्द्र सरकार की इस मानवतावादी कदमों के साथ है। हिन्दुस्तान के अधिकांश नागरिक इस कानून के पक्ष में हैं तथा उनका यह मानना है कि इसे तो वर्षों पूर्व ही लागू कर दिया जाना चाहिए था। जनसमर्थन नहीं मिलने से बौखलाए कांग्रेसी और वामदल के नेता अपनी पार्टियों द्वारा शासित प्रदेशों में इस कानून को लागू न करने का निर्णय कर देश के संघीय-ढांचे पर कुठाराघात कर संविधान का माखौल उड़ाने का काम कर रही हैं। देश की जनता अब सच्चाई समझ चुकी है, वे अब विपक्ष की इस विखंडनवादी बहकावे में आने वाली नहीं है ।
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